उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uf ye dil hadson se ubharta nahin

उफ़ ये दिल हादसों से उभरता नहीं

اف یہ دل حادثوں سے ابھرتا نہیں

शायर: Deepak Purohit4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक हम हैं कि हम पर घड़ों पड़ गया
एक वो हैं कि उन पर ठहरता नहीं

वाँ तो फ़ितरत में शामिल है और हम पे याँ
ग़ैरियत का गुमाँ तक गुज़रता नहीं

था मुक़द्दस वो मानिंद-ए-जन्नत कभी
कू-ए-जानाँ से अब मैं गुज़रता नहीं

किस कशाकश में हैं ज़िंदगी-ओ-क़ज़ा
साँस चलती नहीं दम निकलता नहीं