शायर संग्रह
Deepak Purohit की ग़ज़लें
दीपक पुरोहित के नाम से उपलब्ध 4 पाठ: 4 ग़ज़ल।
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میں مدت سے تری آمد کا یوں عالم سجائے ہوں
main muddat se teri aamad ka yun aalam sajae hun
ग़ज़ल · Deepak Purohit
نہ لازم توقع ہے اہل محل سے
na lazim tawaqqoa hai ahal-e-mahal se
ग़ज़ल · Deepak Purohit
تو کیا رابطہ پھر خدا کا بشر سے
to kya rabta phir KHuda ka bashar se
ग़ज़ल · Deepak Purohit
اف یہ دل حادثوں سے ابھرتا نہیں
uf ye dil hadson se ubharta nahin
ग़ज़ल · Deepak Purohit