उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main muddat se teri aamad ka yun aalam sajae hun

मैं मुद्दत से तिरी आमद का यूँ 'आलम सजाए हूँ

میں مدت سے تری آمد کا یوں عالم سجائے ہوں

शायर: Deepak Purohit4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं मुद्दत से तिरी आमद का यूँ 'आलम सजाए हूँ
'अजब है बे-ख़ुदी दहलीज़ पे नज़रें जमाए हूँ

हुई तारीकियाँ रुख़्सत मुनव्वर ज़ीस्त है मेरी
तुम्हारी याद के जुगनू मैं पलकों पर सजाए हूँ

फिराया दर-ब-दर बे-कल जहाँ में ख़्वाब-ओ-ख़्वाहिश ने
मुसलसल है सुकूँ अरमान-ओ-हसरत को मिटाए हूँ

महकती कैफ़ियत से है मो'अत्तर ज़िंदगी मेरी
तुम्हारी रूह की ख़ुशबू में साँसों में बसाए हूँ