उर्दू शायरी · ग़ज़ल

TuTe taKHte par samundar par karne aae the

टूटे तख़्ते पर समुंदर पार करने आए थे

ٹوٹے تختے پر سمندر پار کرنے آئے تھے

शायर: Zafar Ghauri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

टूटे तख़्ते पर समुंदर पार करने आए थे
हम-सफ़र तूफ़ान-ए-ग़म से प्यार करने आए थे

डर के जंगल की फ़ज़ा से पीछे पीछे हो लिए
लोग छुप कर क़ाफ़िले पर वार करने आए थे

इस गुनह पर मिल रही है संग-सारी की सज़ा
पत्थरों को नींद से बेदार करने आए थे

लोग समझे अपनी सच्चाई की ख़ातिर जान दी
वर्ना हम तो जुर्म का इक़रार करने आए थे

वो भी कर्ब-ए-ख़ुद-बयानी में 'ज़फ़र' ग़लताँ मिला
जिस से अपनी ज़ात का इज़हार करने आए थे