उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu misl-e-hur rashk-e-surayya tera badan

तू मिस्ल-ए-हूर रश्क-ए-सुरय्या तिरा बदन

تو مثل حور رشک ثریا ترا بدن

शायर: Faisal Qadri Gunnauri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू मिस्ल-ए-हूर रश्क-ए-सुरय्या तिरा बदन
लगता है जैसे चाँद का हाला तिरा बदन

क्या गुल खिलाए जान-ए-तमन्ना तिरा बदन
क़ुदरत ने कितना शोख़ बनाया तिरा बदन

काकुल घटाओं जैसे हैं लब गुल के मिस्ल हैं
शबनम कभी हवा कभी शो'ला तिरा बदन

आँखें हैं तेरी जैसे छुपाया हो मै-कदा
साग़र सुबू सुराही या मीना तिरा बदन

होता न ज़िंदगी में फ़िदा फिर वो हीर पर
इक बार देख लेता जो राँझा तिरा बदन

पहलू हमें ग़ज़ल के लिए बख़्श ही गया
जब भी तसव्वुरात में आया तिरा बदन

'फ़ैसल' तिरी अदाओं पे क़ुर्बान हो गया
चंदन सा जब कि सामने देखा तिरा बदन