उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu meri justuju musalsal hai

तू मिरी जुस्तुजू मुसलसल है

تو مری جستجو مسلسل ہے

शायर: Uroosa Jilani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू मिरी जुस्तुजू मुसलसल है
शामिल-ए-गुफ़्तुगू मुसलसल है

मुझ पे तारी ख़ुमार की घड़ियाँ
तू मिरे रू-ब-रू मुसलसल है

ज़र्रा ज़र्रा गवाही देता है
जा-ब-जा तू ही तू मुसलसल है

इश्क़ मुझ को उड़ाए फिरता है
चाकरी कू-ब-कू मुसलसल है

इक मोअ'त्तर फ़ज़ा रची मुझ में
बस गया मुझ में तू मुसलसल है

वज्द तारी 'उरूसा' साँसों पर
शश-जिहत हू ही हू मुसलसल है