उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHud shishe ke ghar mein baiThe patthar phenken auron par

ख़ुद शीशे के घर में बैठे पत्थर फेंकें औरों पर

خود شیشے کے گھر میں بیٹھے پتھر پھینکیں اوروں پر

शायर: Uroosa Jilani4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुद शीशे के घर में बैठे पत्थर फेंकें औरों पर
ज़ख़्मी लोग पुकारें भी तो तोहमत आए लोगों पर

अपनी अपनी सोच में गुम-सुम भाग रहे हैं सारे लोग
ख़ौफ़-ओ-हिरास के अब पहरे हैं हँसते बस्ते शहरों पर

चारों सम्त मुसाफ़िर चीख़ें पत्थर की मानिंद मैं चुप
बहर किनारे देख रहा हूँ टूटी कश्ती लहरों पर

हम लोगों ने जो सोचा है लिक्खा है बे-ख़ौफ़ी से
हाकिम लोगों ने तो ख़ूब लगाए पहरे सोचों पर