शायर संग्रह
Uroosa Jilani की ग़ज़लें
उरूसा जीलानी के नाम से उपलब्ध 4 पाठ: 4 ग़ज़ल।
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خود شیشے کے گھر میں بیٹھے پتھر پھینکیں اوروں پر
KHud shishe ke ghar mein baiThe patthar phenken auron par
ग़ज़ल · Uroosa Jilani
خود پرستی کا نشہ مجھ کو چڑھا ہے آج کل
KHud-parasti ka nasha mujhko chaDha hai aaj-kal
ग़ज़ल · Uroosa Jilani
رنج و الم ستائے تو کہتی ہوں میں غزل
ranj-o-alam satae to kahti hun main ghazal
ग़ज़ल · Uroosa Jilani
تو مری جستجو مسلسل ہے
tu meri justuju musalsal hai
ग़ज़ल · Uroosa Jilani