उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ranj-o-alam satae to kahti hun main ghazal

रंज-ओ-अलम सताए तो कहती हूँ मैं ग़ज़ल

رنج و الم ستائے تو کہتی ہوں میں غزل

शायर: Uroosa Jilani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रंज-ओ-अलम सताए तो कहती हूँ मैं ग़ज़ल
फ़ुर्क़त जो जाँ जलाए तो कहती हूँ मैं ग़ज़ल

चुप-चाप सूनी रात में यादों का रक़्स हो
दिल शोर जब मचाए तो कहती हूँ मैं ग़ज़ल

धड़कन का ज़ोर टूटे कि जज़्बे हों क़ैद में
जब जान फड़फड़ाए तो कहती हूँ मैं ग़ज़ल

कोई नहीं है आसरा दुनिया में अब मिरा
पर रब जो याद आए तो कहती हूँ मैं ग़ज़ल

उस के वजूद से मिरी रौशन है काएनात
बेटी जो मुस्कुराए तो कहती हूँ मैं ग़ज़ल

यूँ तो 'उरूसा' ज़ब्त से वाक़िफ़ हूँ मैं मगर
जब अश्क झिलमिलाए तो कहती हूँ मैं ग़ज़ल