उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu mayassar nahin hai sardi hai

तू मयस्सर नहीं है, सर्दी है

تو میسر نہیں ہے، سردی ہے

शायर: J E Najm4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू मयस्सर नहीं है, सर्दी है
और दिसम्बर की ग़ुंडा-गर्दी है

टूट जाए अगर तो हर अण्डा
कुछ सफ़ेदी है और ज़र्दी है

एक वर्दी है मास भी गोया
एक वर्दी के पीछे वर्दी है

'नज्म' झोली है आँख भी गोया
हम ने फैलाई उस ने भर दी है