उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pal do pal ki jo aashnai thi

पल दो पल की जो आश्नाई थी

پل دو پل کی جو آشنائی تھی

शायर: J E Najm7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पल दो पल की जो आश्नाई थी
मुझ को लगता था कल ख़ुदाई थी

मैं ने ठुकरा दिया था दुनिया को
जब यहाँ तू पलट के आई थी

फिर किसी दूसरे की हो जाना
ये बता मुझ में क्या बुराई थी

माँगते क्यों हो तुम दलील-ए-ख़ुदा
गर ख़ुदा था तो ये ख़ुदाई थी

रोग भी मुश्तरक जदीद सा था
हर तरफ़ एक ही दुहाई थी

जिस के लब पर सवाल आया था
आग उस ने ही आ लगाई थी

'नज्म' उस मोड़ पर चले आए
जिस जगह साँस डगमगाई थी