उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek chehre pe aD gaya hun main

एक चेहरे पे अड़ गया हूँ मैं

ایک چہرے پہ اڑ گیا ہوں میں

शायर: J E Najm5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक चेहरे पे अड़ गया हूँ मैं
किस मुसीबत में पड़ गया हूँ मैं

तू समझ हिज्र मेरी मर्ज़ी है
तू समझ ख़ुद बिछड़ गया हूँ मैं

जैसे गुल-दाँ ख़िज़ाँ के मौसम में
देखो कितना उजड़ गया हूँ मैं

तेरी इस्लाह का नतीजा है
इस क़दर जो बिगड़ गया हूँ मैं

नीलगूँ झील ये बताती है
तेरी आँखों को लड़ गया हूँ मैं