उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard baKHsha gaya hai sahne ko

दर्द बख़्शा गया है सहने को

درد بخشا گیا ہے سہنے کو

शायर: J E Najm5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द बख़्शा गया है सहने को
कैसी दुनिया मिली है रहने को

क़ाफ़िया तंग है अगरचे मियाँ
अश्क काफ़ी हैं हाल कहने को

इतनी अच्छी नहीं है दर-ब-दरी
सीना हाज़िर है तेरे रहने को

हसब-ए-साबिक़ वो कह नहीं पाए
हम गए थे जो बात कहने को

'नज्म' क़ाएम है ज़ब्त भी लेकिन
अश्क बिफरे हुए हैं बहने को