उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu mai-kada mein ek aisa nizam paida kar

तू मै-कदा में इक ऐसा निज़ाम पैदा कर

تو میکدہ میں اک ایسا نظام پیدا کر

शायर: Sabir Aarwi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू मै-कदा में इक ऐसा निज़ाम पैदा कर
कि सब के लब को जो पहुँचे वो जाम पैदा कर

रिदा-ए-हिज्र में लिपटी रहे तबीअत-ए-शौक़
सहर की याद भुला दे वो शाम पैदा कर

लबों पे नाम अगर आ गया तो फ़ख़्र नहीं
जो हो सके तो दिलों में मक़ाम पैदा कर

सुख़न मुहाल नहीं उन की अंजुमन में मगर
बस इतनी शर्त है इक ख़ुश-कलाम पैदा कर