उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu bhi fariyaadi hua tha iltija maine bhi ki

तू भी फ़रियादी हुआ था इल्तिजा मैं ने भी की

تو بھی فریادی ہوا تھا التجا میں نے بھی کی

शायर: Obaid Siddiqi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू भी फ़रियादी हुआ था इल्तिजा मैं ने भी की
तू न था मुजरिम अकेला हाँ ख़ता मैं ने भी की

ज़ुल्म दोनों ने किया था दोनों थे इस में शरीक
इब्तिदा गर तू ने की तो इंतिहा मैं ने भी की

सिर्फ़ तू ने ही नहीं की जुस्तुजू-ए-चारा-गर
दर्द जब हद से बढ़ा तो कुछ दवा मैं ने भी की

किस ने क्या माँगा फ़लक से और किस को क्या मिला
हाथ तू ने भी उठाए थे दुआ मैं ने भी की

मैं तिरा हिस्सा न बन पाया ये अच्छा ही हुआ
गो ये ख़्वाहिश ऐ हुजूम-दिल-रुबा मैं ने भी की

सब्ज़ा-ए-बेगाना से रिश्ता मिरा कुछ कम नहीं
इस चमन की आबयारी ऐ घटा मैं ने भी की