उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baiThe biThae aaj phir kis ka KHayal aa gaya

बैठे बिठाए आज फिर किस का ख़याल आ गया

بیٹھے بٹھائے آج پھر کس کا خیال آ گیا

शायर: Obaid Siddiqi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बैठे बिठाए आज फिर किस का ख़याल आ गया
चेहरे का रंग उड़ गया रंग-ए-मलाल आ गया

उलझन में पड़ गया हूँ मैं दिल का करूँ तो क्या करूँ
शीशा नहीं ये काम का इस में तो बाल आ गया

पूरा न कर सकूँगा अब तुझ से कभी मुकालिमा
आँखें थीं महव-ए-गुफ़्तुगू दिल का सवाल आ गया

करनी है तर्क जिस जगह तेरी तलाश-ओ-आरज़ू
सहरा में अब मक़ाम वो मेरे ग़ज़ाल आ गया

रूई की तरह शहर में उड़ने लगी है ये ख़बर
उस को ही बस पता नहीं उस का ज़वाल आ गया

मैं ने तो अपना आईना रक्खा था उस के रू-ब-रू
इतनी सी एक बात थी उस को जलाल आ गया