उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu agar be-wafa nahin hota

तू अगर बे-वफ़ा नहीं होता

تو اگر بے وفا نہیں ہوتا

शायर: Umair Samar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू अगर बे-वफ़ा नहीं होता
मैं भी इतना बुरा नहीं होता

तू ने रस्ता बदल लिया अपना
वर्ना होने को क्या नहीं होता

कोई रहता है आस-पास मिरे
पर कभी सामना नहीं होता

जिस की फ़ितरत में हो वफ़ा-दारी
वो कभी बे-वफ़ा नहीं होता

कह दिया फूल से ये ख़ुशबू ने
'इश्क़ का दायरा नहीं होता