उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har gunah-gar parsa hoga

हर गुनह-गार पारसा होगा

ہر گنہگار پارسا ہوگا

शायर: Umair Samar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर गुनह-गार पारसा होगा
ये अदालत का फ़ैसला होगा

उस को ग़द्दार माना जाएगा
जिस के हाथों में आइना होगा

रात भर क़हक़हे लगाता है
हो न हो कोई ग़म-ज़दा होगा

ये ख़बर सुन के हँस पड़ा सूरज
कल चराग़ों में मशवरा होगा

उस की बातों से ऐसा लगता था
पहले वो बादशह रहा होगा

अब वही पाएगा वक़ार 'समर'
जो कि तहज़ीब-याफ़ता होगा