उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbaton ka ye gulshan bikharne wala hai

मोहब्बतों का ये गुलशन बिखरने वाला है

محبتوں کا یہ گلشن بکھرنے والا ہے

शायर: Umair Samar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बतों का ये गुलशन बिखरने वाला है
किसी की माँग में सिंदूर भरने वाला है

मैं जा रहा हूँ तिरे शहर से मगर ये दिल
तमाम 'उम्र यहीं पर ठहरने वाला है

वो इक चराग़ जिसे मैं ने आफ़्ताब किया
सुना है मेरे मुक़ाबिल उतरने वाला है

उसे बताओ कि उड़ते हैं हौसलों से हम
जो कह रहा है मिरे पर कतरने वाला है

मुझे ये डर है तुझे भूल ही न जाऊँ मैं
बस एक ज़ख़्म बचा है जो भरने वाला है