उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kinare jhil ke baiTha hua hai

किनारे झील के बैठा हुआ है

کنارے جھیل کے بیٹھا ہوا ہے

शायर: Umair Samar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किनारे झील के बैठा हुआ है
किसी की याद में खोया हुआ है

उसे किस तरह हम बाहर निकालें
तेरी आँखों में जो डूबा हुआ है

जो दिल तुम हसरतों से माँगती हो
ज़माने भर का ठुकराया हुआ है

जलाया है किसी ने उन को दिन में
दियों के साथ में धोका हुआ है

बस इक इस बात पर ख़ुश है पड़ोसी
मिरे आँगन का बटवारा हुआ है

बनी हैं एक दो गलियों कि सड़कें
उसे भी बोर्ड पर लिक्खा हुआ है