उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhein bachani hai mahfilon mein bas apni izzat to chup hi rahna

तुम्हें बचानी है महफ़िलों में बस अपनी 'इज़्ज़त तो चुप ही रहना

تمہیں بچانی ہے محفلوں میں بس اپنی عزت تو چپ ہی رہنا

शायर: Naeem Najmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हें बचानी है महफ़िलों में बस अपनी 'इज़्ज़त तो चुप ही रहना
जो चाहते हो बढ़ाना यारो जहाँ में क़ीमत तो चुप ही रहना

लबों पे अपने भला मैं कैसे करूँगा क़ाबू कोई बताए
वो कह रहे हैं कहीं जो देखो हसीन सूरत तो चुप ही रहना

न मुँह बनाना न लब हिलाना यही है बेहतर तुम्हारे हक़ में
ग़लत रविश पर कोई जो तुम को करे नसीहत तो चुप ही रहना

ख़मोश रहना वहाँ ग़लत है जहाँ ज़रूरी हो बात करना
जहाँ तुम्हारे हो बोलने की नहीं ज़रूरत तो चुप ही रहना

जहाँ पे बातें बनाने वाले बस अपनी बातें बना रहे हूँ
ज़बाँ-दराज़ी की गर नहीं है तुम्हारी 'आदत तो चुप ही रहना