उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-wajh log aae hain pani to hai nahin

बे-वज्ह लोग आए हैं पानी तो है नहीं

بے وجہ لوگ آئے ہیں پانی تو ہے نہیں

शायर: Naeem Najmi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-वज्ह लोग आए हैं पानी तो है नहीं
वैसे भी उन को आग बुझानी तो है नहीं

जिस दिन उबाल आ गया फिर ख़ैरियत कहाँ
ये ख़ून है हमारा ये पानी तो है नहीं

बेकार आप बैठे हैं घेरे हुए मुझे
अब मेरे पास कोई कहानी तो है नहीं

क्या गुफ़्तुगू करूँ मैं यहाँ अहल-ए-'इल्म से
लहजे में मेरे इतनी रवानी तो है नहीं

समझे न जो इशारे को थोड़ा बहुत मिरे
कहने को अब वो इतनी दिवानी तो है नहीं

एल्बम से अपने दिल की हटाते हो किस लिए
तस्वीर मेरी इतनी पुरानी तो है नहीं

तेरे बग़ैर सैर को जाऊँ मैं किस लिए
तेरे बग़ैर शाम सुहानी तो है नहीं

इक बे-वफ़ा से कर के मोहब्बत फ़ुज़ूल में
दर दर की मुझ को ख़ाक उड़ानी तो है नहीं

नश्शा हमारे सर पे था जिस का चढ़ा हुआ
ऐ यार हम में अब वो जवानी तो है नहीं

बच्चे जिसे सँभाल के 'नजमी' न रख सके
दस्तार मेरी इतनी पुरानी तो है नहीं