उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jam ki hai na ye subu ki hai

जाम की है न ये सुबू की है

جام کی ہے نہ یہ سبو کی ہے

शायर: Naeem Najmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाम की है न ये सुबू की है
ये महक तो मिरे लहू की है

उँगलियाँ मेरी ख़ून रोने लगीं
ज़िंदगी इस क़दर रफ़ू की है

ये जो नूरानियत है चेहरे पर
ये करामत मिरे वुज़ू की है

अपने परवरदिगार से मैं ने
देर तक रात गुफ़्तुगू की है

ख़ुद से समझौता अब नहीं होगा
बात अब मेरी आबरू की है

बारगाह-ए-ख़ुदा में ऐ 'नजमी'
जब दु'आ की है बा-वुज़ू की है