उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har waqt zamane pe nazar rakkhe hue hain

हर वक़्त ज़माने पे नज़र रक्खे हुए हैं

ہر وقت زمانے پہ نظر رکھے ہوئے ہیں

शायर: Naeem Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर वक़्त ज़माने पे नज़र रक्खे हुए हैं
किस हाल में हैं दोस्त ख़बर रक्खे हुए हैं

रातों की सियाही का असर कुछ नहीं उन पर
वो लोग जो आँखों में सहर रक्खे हुए हैं

तोहफ़े जो मोहब्बत में कभी तुम से मिले थे
अब तक बड़ी तरतीब से घर रक्खे हुए हैं

बेदार अगर हो भी गए उठ न सकेंगे
हम ऐसे ही इक ज़ानू पे सर रक्खे हुए हैं

मुरझाए हुए बीत गया एक ज़माना
वो फूल किताबों में मगर रक्खे हुए हैं

हम ने भी कमाए हैं मोहब्बत के ख़ज़ाने
झोली में हमारी भी गुहर रक्खे हुए हैं

दीदार की ख़्वाहिश में हर इक वक़्त ही 'नजमी'
हम उस के दरीचे पे नज़र रक्खे हुए हैं