उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhaare aalam se mera aalam zara alag hai

तुम्हारे आलम से मेरा आलम ज़रा अलग है

تمہارے عالم سے میرا عالم ذرا الگ ہے

शायर: Sabir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हारे आलम से मेरा आलम ज़रा अलग है
हो तुम भी ग़मगीं मगर मिरा ग़म ज़रा अलग है

यहाँ पे हँसना रवा है रोना है बे-हयाई
सुक़ूत-ए-शहर-ए-जुनूँ का मातम ज़रा अलग है

खुलेंगे शाख़ों के राज़ अहल-ए-चमन पर अब के
गिरह गिरह से उलझती शबनम ज़रा अलग है

तिरे तसव्वुर की धूप ओढ़े खड़ा हूँ छत पर
मिरे लिए सर्दियों का मौसम ज़रा अलग है

ज़रा सा बदला हुआ है तर्ज़-ए-कलाम 'साबिर'
वही पुराने हैं लफ़्ज़ दम-ख़म ज़रा अलग है