उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHubiyon ko masKH kar ke aib jaisa kar diya

ख़ूबियों को मस्ख़ कर के ऐब जैसा कर दिया

خوبیوں کو مسخ کر کے عیب جیسا کر دیا

शायर: Sabir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ूबियों को मस्ख़ कर के ऐब जैसा कर दिया
हम ने यूँ ऐबों की आबादी को दूना कर दिया

तय तो ये था हर बदी की इंतिहा तक जाएँगे
बे-ख़याली में ये कैसा काम अच्छा कर दिया

मुझ से कल महफ़िल में उस ने मुस्कुरा कर बात की
वो मिरा हो ही नहीं सकता ये पक्का कर दिया

चिलचिलाती-धूप थी लेकिन था साया हम-क़दम
साएबाँ की छाँव ने मुझ को अकेला कर दिया

मैं भी अब कुछ कुछ समझने लग गया हूँ ऐ तबीब
दर्द ने सीने में उठ कर क्या इशारा कर दिया