उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab safar KHatm hua aur wo laga achchha ab

अब सफ़र ख़त्म हुआ और वो लगा अच्छा अब

اب سفر ختم ہوا اور وہ لگا اچھا اب

शायर: Sabir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब सफ़र ख़त्म हुआ और वो लगा अच्छा अब
उस ने यूँ देखा मुझे जैसे कहा अच्छा अब

उस ने की है नई तारीख़ मुलाक़ात की तय
और तय मैं ने किया है कि नहीं मिलना अब

कोई रिश्ता ही नहीं हम-सफ़री का रिश्ता
यूँ भी रिश्तों को निभाने में है क्या रक्खा अब

वो चला जाए बहुत दूर कोई बात नहीं
मिरी पलकों से न बरसेगा कोई चेहरा अब

जाने किस शहर-ए-तिलिस्मात से लौटा 'साबिर'
अपने हर शे'र में लिखता है नया क़िस्सा अब