उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumko chaha tumko puja

तुम को चाहा तुम को पूजा

تم کو چاہا تم کو پوجا

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi15 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम को चाहा तुम को पूजा
क्या ये मेरा पागल-पन था

पल में तोला पल में माशा
नादाँ ये दुनिया है दुनिया

तेरा हो कर जीना चाहा
मैं भी कितना दीवाना था

तेरा रुत्बा अर्श से ऊँचा
तुझ को मुझ से निस्बत ही क्या

मेरी तो हस्ती ही क्या थी
लेकिन तू ने किस को बख़्शा

तेरा हुस्न है आलम आलम
मेरा इश्क़ है तन्हा तन्हा

ओ मुँह फेर के जाने वाले
दुनिया क्या सोचेगी सोचा

क़तरे की औक़ात ही क्या है
क़तरा क़तरा दरिया दरिया

कौन उठा तेरी महफ़िल से
किस की उम्र का साग़र छलका

अपना अपना ज़ौक़-ए-नज़र है
किस का जल्वा कैसा पर्दा

तेरी इज़्ज़त महफ़िल महफ़िल
मैं शाइ'र आवारा रुस्वा

माना ख़ाक-बसर हूँ फिर भी
याद करोगे याद आऊँगा

ये जीना भी क्या जीना है
इस जीने से मरना अच्छा

दुनिया किस को रास आई है
किस को रास आएगी दुनिया

हम ने सुध-बुध खो दी 'आसी'
उस ने इस अंदाज़ से देखा