उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum hamare qarib aane ko

तुम हमारे क़रीब आने को

تم ہمارے قریب آنے کو

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम हमारे क़रीब आने को
करते रहते हो ख़ुश ज़माने को

उस के कूचे का फ़र्श पक्का है
हाथ मलता हूँ ख़ाक उड़ाने को

चलना फिरना कोई ज़रूरी नहीं
उस की महफ़िल में आने जाने को

जब कि मैं ने समझना छोड़ दिया
वो तुला है समझ में आने को

उसे कैसे भुलाए कोई जिसे
याद करना पड़े भुलाने को

तुम तो सब कुछ बताए देते हो
कुछ बचा कर रखो छुपाने को

उस ने कुछ देर सुन लिया वर्ना
कौन सुनता मिरे फ़साने को

तेरी मौजूदगी में कम से कम
जी तो करता है मुस्कुराने को