उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhe kalim koi kaise KHush-kalam kahe

तुझे 'कलीम' कोई कैसे ख़ुश-कलाम कहे

تجھے کلیمؔ کوئی کیسے خوش کلام کہے

शायर: Kaleem Aajiz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझे 'कलीम' कोई कैसे ख़ुश-कलाम कहे
जो दिन को रात बताए सहर को शाम कहे

पिए बग़ैर कहो तो ये तिश्ना-काम कहे
वो राज़-ए-मय जो सुराही कहे न जाम कहे

न जाने रूठ के बैठा है दिल का चैन कहाँ
मिले तो उस को हमारा कोई सलाम कहे

कहूँ जो बरहमन ओ शैख़ से हक़ीक़त-ए-इश्क़
ख़ुदा ख़ुदा ये पुकारे वो राम राम कहे

मैं ग़म की रागनी बे-वक़्त भी अगर छेड़ूँ
ज़बान-ए-वक़्त मुझे वक़्त का इमाम कहे