उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhe bhulane ki ab justuju nahin karte

तुझे भुलाने की अब जुस्तुजू नहीं करते

تجھے بھلانے کی اب جستجو نہیں کرتے

शायर: SabeenSaif7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझे भुलाने की अब जुस्तुजू नहीं करते
कि अब किसी से तिरी गुफ़्तुगू नहीं करते

वुजूद को मिरे मौजूदगी समझते हैं
वो ना-समझ जो मिरी आरज़ू नहीं करते

हैं मेहरबान शजर किस क़दर कि हो के ख़फ़ा
कभी वो फूलों को बे-रंग-ओ-बू नहीं करते

जो अपने 'इश्क़ को ख़ुद में समाए फिरते हैं
तलाश फिर वो उसे कू-ब-कू नहीं करते

वो जिन को पास हो अपने घरों की हुर्मत का
किसी को वो कभी बे-आबरू नहीं करते

रुमूज़-ए-‘इश्क़ जो इक बार जान लेते हैं
किसी के दिल को कभी वो लहू नहीं करते

नमाज़ ग़ज़लों की मेरी अदा नहीं होती
जो हर्फ़ नाम से तेरे वुज़ू नहीं करते