उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhe bhi husn-e-mutlaq ka abhi didar ho jae

तुझे भी हुस्न-ए-मुत्लक़ का अभी दीदार हो जाए

تجھے بھی حسن مطلق کا ابھی دیدار ہو جائے

शायर: Ehya Bhojpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझे भी हुस्न-ए-मुत्लक़ का अभी दीदार हो जाए
मिरे महबूब के जो रू-ब-रू इक बार हो जाए

सुकून-ओ-चैन मिल जाए ख़ुदा भी यार हो जाए
अगर इंसान में इंसानियत बेदार हो जाए

लहू में गर्म-जोशी रख क़लम में ज़ोर पैदा कर
नहीं तो हर क़दम पर इक नई दीवार हो जाए

क़लंदर हूँ मुझे शोहरत की चाहत ही नहीं वर्ना
मैं रख दूँ जिस के सर पर हाथ वो सरदार हो जाए

सुना है दर्द से 'अहया' क़लम में ज़ोर मिलता है
सो मैं ने भी दु'आ कर ली मुझे भी प्यार हो जाए