उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hijrat karo to rishta-o-saman chhoD kar

हिजरत करो तो रिश्ता-ओ-सामान छोड़ कर

ہجرت کرو تو رشتہ و سامان چھوڑ کر

शायर: Ehya Bhojpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हिजरत करो तो रिश्ता-ओ-सामान छोड़ कर
वर्ना न जाओ तुम कभी मैदान छोड़ कर

यूँ तो लड़ाई झगड़े की आदत नहीं मुझे
फिर भी ग़लत किया था गरेबान छोड़ कर

अब कोई मिलने-जुलने को आता नहीं है घर
मैं भी हूँ बंद कमरे में दालान छोड़ कर

अच्छे बुरे से पाक यहाँ कोई शय नहीं
तुम फ़ाएदा गिना करो नुक़सान छोड़ कर

ख़ुशबू बिखेरना मिरी फ़ितरत है दोस्तो
ख़ुशबू बिखेरता हूँ मैं गुल-दान छोड़ कर