उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab ho gaya kamal to cigarette jala liya

जब हो गया कमाल तो सिगरेट जला लिया

جب ہو گیا کمال تو سگریٹ جلا لیا

शायर: Ehya Bhojpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब हो गया कमाल तो सिगरेट जला लिया
या फिर हुआ मलाल तो सिगरेट जला लिया

ख़ुद पर किसी को हँसने का मौक़ा नहीं दिया
पूछा किसी ने हाल तो सिगरेट जला लिया

सूखे गले से लफ़्ज़ को लाना था ज़ेहन तक
जब आ गया ख़याल तो सिगरेट जला लिया

ग़ुस्से में ख़ूँ के घूँट तो पीता रहा मगर
आँखें हुईं जो लाल तो सिगरेट जला लिया

अच्छी नहीं है शय मगर 'अहया' मैं क्या करूँ
करना है शुक्र-ए-हाल तो सिगरेट जला लिया