उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hain mere zaKHm ki ranaiyan ajib-o-gharib

हैं मेरे ज़ख़्म की रानाइयाँ अजीब-ओ-ग़रीब

ہیں میرے زخم کی رعنائیاں عجیب و غریب

शायर: Ehya Bhojpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हैं मेरे ज़ख़्म की रानाइयाँ अजीब-ओ-ग़रीब
कि उस को चाहिए गहराइयाँ अजीब-ओ-ग़रीब

ये किस का ज़ोर है मेरे चराग़ की लौ पर
बना रहा है जो परछाइयाँ अजीब-ओ-ग़रीब

हमारे ख़्वाब की गलियों से कौन गुज़रा है
कि आ रही हैं ये अंगड़ाइयाँ अजीब-ओ-ग़रीब

नज़र उतारती है वक़्त वक़्त पर मेरी
मिली है माओं को बीनाइयाँ अजीब-ओ-ग़रीब

जलाए मेरी ही सिगरेट मिरी अयादत पर
ये मेरा दोस्त भी है काइयाँ अजीब-ओ-ग़रीब