उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujh sa nahin jahan mein KHun-rez dusra

तुझ सा नहीं जहान में ख़ूँ-रेज़ दूसरा

تجھ سا نہیں جہان میں خوں ریز دوسرا

शायर: Bal Mukund Besabr4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझ सा नहीं जहान में ख़ूँ-रेज़ दूसरा
पैदा हुआ कहाँ से तू चंगेज़ दूसरा

सीने में मेरे है जो दिल-ए-दाग़दार इश्क़
ये शम्स दूसरा है ये तबरेज़ दूसरा

ग़ालिब को क्यों ज़ुहूरी-ए-सानी न जानिए
दिल्ली को क्यों समझिए न तरशेज़ दूसरा

तेरा लब और मेरा लब-ए-जाम और है
है एक पुर-शकर नमक-आमेज़ दूसरा