उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gar dost bhi sau jafa karega

गर दोस्त भी सौ जफ़ा करेगा

گر دوست بھی سو جفا کرے گا

शायर: Bal Mukund Besabr8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गर दोस्त भी सौ जफ़ा करेगा
दुश्मन बेचारा क्या करेगा

जब बंद-ए-क़बा वो वा करेगा
गुल चाक अपनी क़बा करेगा

कर के कोई चाह क्या करेगा
फ़रियाद-ओ-फ़ुग़ाँ क्या करेगा

दाग़ अपना चराग़-ए-ख़ाना-ए-दिल
ता सुब्ह-ए-अबद जला करेगा

जुज़ बे-कसी अपना और है कौन
जो दा'वा-ए-ख़ूँ-बहा करेगा

सर-गश्तगी की न राह हो तय
जब तक कि न सर को पा करेगा

जब कट के गिरेगा उस के पा पर
सर सज्दा-ए-शुक्र अदा करेगा

जब उम्र ही बेवफ़ा है 'बेसब्र'
फिर कौन भला वफ़ा करेगा