उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaba-e-dil mein runuma hain aap

का'बा-ए-दिल में रूनुमा हैं आप

کعبۂ دل میں رونما ہیں آپ

शायर: Bal Mukund Besabr4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

का'बा-ए-दिल में रूनुमा हैं आप
ब-ख़ुदा बुत नहीं ख़ुदा हैं आप

न ख़फ़ा मुझ से हो तो है ये अर्ज़
कि भला मुझ से क्यों ख़फ़ा हैं आप

माँगते हैं ख़ुदा से आप को सब
मेरी दानिस्त में दुआ हैं आप

किस मसीहा के दर्द-ए-उल्फ़त में
मियाँ 'बेसब्र' मुब्तला हैं आप