उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahaar aae anadil ne mil KHarosh kiya

बहार आए अनादिल ने मिल ख़रोश किया

بہار آئے عنادل نے مل خروش کیا

शायर: Bal Mukund Besabr5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहार आए अनादिल ने मिल ख़रोश किया
बदन में ख़ूँ ने सुराही में मय ने जोश किया

ज़हे ज़हे मेरे ईमान-ओ-दीं कि मैं ने उन्हें
फ़िदा-ए-फ़र्क़-ए-ख़ुम-ओ-पा-ए-मय-फ़रोश किया

नक़ाब मुँह से उठा कर ये किस ने दी आवाज़
कि दफ़अ'तन हमा-तन मुझ को चश्म-ओ-गोश किया

निकल गया था लहू मेरे तन का रोने में
रहा था जो कोई क़तरा सो ग़म ने नोश किया

कलाम क्यों न हो 'बेसब्र' मेरा मस्ताना
कि जाम है ख़ुम-ए-हाफ़िज़ से मैं ने नोश किया