उर्दू शायरी · ग़ज़ल

toDna chahte the pe TuTa nahin

तोड़ना चाहते थे पे टूटा नहीं

توڑنا چاہتے تھے پہ ٹوٹا نہیں

शायर: Vakeel Ahmad Hayat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तोड़ना चाहते थे पे टूटा नहीं
दिल मिरा कोई मिट्टी का मटका नहीं

शहर-ए-दिल में मिरे तज़्किरे हैं तिरे
तू हसीं मह-जबीं कोई तुझ सा नहीं

सब हवस के पुजारी हैं चारों तरफ़
कोई मजनूँ नहीं कोई लैला नहीं

वो पहन कर जिसे बेटियाँ ख़ुश न हों
हाँ कफ़न है वो शादी का जोड़ा नहीं

ज़हर-ए-शीरीं है मग़रिब की तहज़ीब ये
भूल कर उस के नज़दीक जाना नहीं

लुत्फ़-ए-मंज़िल 'हयात' उस से पूछो ज़रा
इश्क़ के रास्ते में जो भटका नहीं