उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum hain buniyaad to har shaKHs manare jaisa

हम हैं बुनियाद तो हर शख़्स मनारे जैसा

ہم ہیں بنیاد تو ہر شخص منارے جیسا

शायर: Vakeel Ahmad Hayat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम हैं बुनियाद तो हर शख़्स मनारे जैसा
हम को मिलता ही नहीं कोई हमारे जैसा

आज बस्ती में हमारी है अजब ही रौनक़
आज निकला है यहाँ चाँद तुम्हारे जैसा

क्या भला उन से जुदा मेरी है पहचान कोई
वो समुंदर की तरह हैं मैं किनारे जैसा

हाल कुछ दिल का हुआ गर्दिश-ए-दौराँ के सबब
किसी मुफ़्लिस के बिलकते हुए प्यारे जैसा

रोज़ लड़ता है वो अंदर के अँधेरों से 'हयात'
आप को लगता है जो शख़्स सितारे जैसा