उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahan ai parda-nashin KHud ko chhupaya hua hai

कहाँ ऐ पर्दा-नशीं ख़ुद को छुपाया हुआ है

کہاں اے پردہ نشیں خود کو چھپایا ہوا ہے

शायर: Vakeel Ahmad Hayat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहाँ ऐ पर्दा-नशीं ख़ुद को छुपाया हुआ है
तेरा दीवाना तिरे शहर में आया हुआ है

तेरी तस्वीर ने तस्ख़ीर किया है दिल को
तेरा ही अक्स मिरे ज़ेहन पे छाया हुआ है

दिल है सादा कि समझ बैठा है उस को ग़म-ख़्वार
वो जो अपने ही किसी काम से आया हुआ है

अपनी राहों को भी ज़ाहिर नहीं होने देते
हम ने मंज़िल को भी दुनिया से छुपाया हुआ है

इश्क़ की आग पे काग़ज़ की चला कर कश्ती
एक दीवाने ने दुनिया को हिलाया हुआ है

उन पे ये अन्फ़ुस-ओ-आफ़ाक़ भी क़ुर्बान 'हयात'
मरकज़-ए-इश्क़ जिन्हें हम ने बनाया हुआ है