उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri yaadon ki naqqashi khurach kar phenk aae hain

तिरी यादों की नक़्क़ाशी खुरच कर फेंक आए हैं

تری یادوں کی نقاشی کھرچ کر پھینک آئے ہیں

शायर: Nadeem Mahir4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी यादों की नक़्क़ाशी खुरच कर फेंक आए हैं
झुलसती रेत पर हम इक समुंदर फेंक आए हैं

अक़ीक़-ओ-नीलम-ओ-लअ'ल-ओ-जवाहर फेंक आए हैं
समुंदर में अजब मंज़र शनावर फेंक आए हैं

तिरी यादें तिरी बातें सभी औराक़-ए-पारीना
हम इक इक कर के सब दिल-सोज़ मंज़र फेंक आए हैं

तलातुम हो कि तूफ़ाँ हो ये दरिया पार करना है
हम अपनी कश्तियाँ मौजों के अंदर फेंक आए हैं