उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum buzurgon ki aan chhoD aae

हम बुज़ुर्गों की आन छोड़ आए

ہم بزرگوں کی آن چھوڑ آئے

शायर: Nadeem Mahir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम बुज़ुर्गों की आन छोड़ आए
ख़ानदानी मकान छोड़ आए

उस क़बीले में सारे गूँगे थे
हम जहाँ पर ज़बान छोड़ आए

उस का दरवाज़ा बंद पाया तो
दस्तकों के निशान छोड़ आए

रोटी कपड़े मकान की ख़ातिर
रोटी कपड़ा मकान छोड़ आए

एक उस को तलाश करने में
हम ज़मीं आसमान छोड़ आए

अब सफ़र है यक़ीन की जानिब
वसवसे और गुमान छोड़ आए