उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri yaad mein din basar ho raha hai

तिरी याद में दिन बसर हो रहा है

تری یاد میں دن بسر ہو رہا ہے

शायर: Laeeq Akbar Sahaab6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी याद में दिन बसर हो रहा है
तिरा ज़िक्र शाम-ओ-सहर हो रहा है

मिरा दिल मोहब्बत पे माइल हुआ है
तिरे हुस्न का कुछ असर हो रहा है

तिरी झील-आँखों में डूबा है क्या दिल
शिकारा कोई दर-ब-दर हो रहा है

गुलाबी लबों की वो भीगी सी नरमी
कँवल कोई शबनम से तर हो रहा है

नहीं है कोई मेरे ज़ख़्मों का मरहम
पशेमाँ मिरा चारागर हो रहा है

तुझे उस ने दिल के सदफ़ में उतारा
'सहाब' अश्क से तू गुहर हो रहा है