उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri aawaz dhimi ho rahi hai

तिरी आवाज़ धीमी हो रही है

تری آواز دھیمی ہو رہی ہے

शायर: Fahmi Badayuni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी आवाज़ धीमी हो रही है
कोई दीवार ऊँची हो रही है

ख़ुदा पर माथापच्ची हो रही है
उसी से हर तरक़्क़ी हो रही है

तिरी आँखें बताती हैं कहीं से
मिरी ताईद जारी हो रही है

वो होटल था वहाँ पर कौन कहता
सुनो जी चाय ठंडी हो रही है

बला की भीड़ है उस की गली में
तरफ़-दारों की गिनती हो रही है

हवा ख़ुश्बू उड़ा लाई है उस की
गुलों में छीना-झपटी हो रही है

गिरा है आँख में बस एक ज़र्रा
मगर तकलीफ़ कितनी हो रही है

फ़ज़ा अच्छी नहीं है बज़्म-ए-दिल की
ग़मों में काना-फूसी हो रही है

कोई चलता नहीं राह-ए-ख़ुदा पर
ज़बानी जी-हुज़ूरी हो रही है