उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere hijr ne jo sitam kiya koi dekhta

तिरे हिज्र ने जो सितम किया कोई देखता

ترے ہجر نے جو ستم کیا کوئی دیکھتا

शायर: Umair Ali Anjum4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरे हिज्र ने जो सितम किया कोई देखता
मिरी वहशतें मिरा रतजगा कोई देखता

किसी अध-खुले से किवाड़ में बड़े शौक़ से
कभी सुब्ह-दम कोई झाँकता कोई देखता

किसी दूसरे का वो हो गया मैं खड़ा रहा
मिरी बेबसी मिरा हौसला कोई देखता

कोई पालकी तो गुज़र गई थी 'उमैर' जी
मगर उस घड़ी मिरा देखना कोई देखता