उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere ham-suKHan mere ham-nawa teri KHair ho

मिरे हम-सुख़न मिरे हम-नवा तिरी ख़ैर हो

مرے ہم سخن مرے ہم نوا تری خیر ہو

शायर: Umair Ali Anjum7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे हम-सुख़न मिरे हम-नवा तिरी ख़ैर हो
तू विसाल-रुत में जुदा हुआ तिरी ख़ैर हो

मिरे दर्द तेरी 'अता सही मैं ख़फ़ा सही
तिरे हक़ में करता हूँ मैं दु'आ तिरी ख़ैर हो

तुझे सारे शहर को छोड़ कर था चुना कभी
तू ही हाथ हम से छुड़ा गया तिरी ख़ैर हो

कोई तुझ से शिकवा गिला करूँ न मिला करूँ
मिरा ज़र्फ़ ही नहीं मानता तिरी ख़ैर हो

वो तो कर रहा था जुदाइयों की वज़ाहतें
मिरा सिर्फ़ एक जवाब था तिरी ख़ैर हो

न नज़र नज़र में तू दे सदा मुझे भूल जा
नहीं मुझ में अब नहीं हौसला तिरी ख़ैर हो

ये नदामतें न दिखा मुझे न सता मुझे
जा तुझे फ़क़ीर ने कह दिया तिरी ख़ैर हो