उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere hi aansuon ke shikasta bahaw par

मेरे ही आँसुओं के शिकस्ता बहाव पर

میرے ہی آنسوؤں کے شکستہ بہاؤ پر

शायर: Umair Ali Anjum6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरे ही आँसुओं के शिकस्ता बहाव पर
मुझ को बिठा गया कोई काग़ज़ की नाव पर

मेरे परों को काट के वो साथ ले गया
अब तो मैं उड़ रहा हूँ हवा के दबाव पर

बिगड़ी हुई है चाल कुछ ऐसी तिरे बग़ैर
जैसे मैं चल रहा हूँ सुलगते अलाव पर

कितना हसीन ख़्वाब दिखाई दिया मुझे
मरहम लगा रहा था कोई मेरे घाव पर

मंज़िल तलक पहुँचने का कहता रहा मगर
मुझ से नज़र चुरा गया पहले पड़ाव पर

उस से कहो 'उमैर' वो लौट आए एक बार
आई हुई है ज़िंदगी अब चल-चलाव पर