उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni basti mein andhera nahin hone denge

अपनी बस्ती में अंधेरा नहीं होने देंगे

اپنی بستی میں اندھیرا نہیں ہونے دیں گے

शायर: Umair Ali Anjum4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी बस्ती में अंधेरा नहीं होने देंगे
जैसा तुम चाहोगे वैसा नहीं होने देंगे

सब कराची को उजालों का नगर कहते हैं
इस को आसार-ए-क़दीमा नहीं होने देंगे

हक़ जो बनता है मुहाजिर का वो लेंगे तुम से
अपनी हम क़ौम से धोका नहीं होने देंगे

हम न होते तो वतन बेच के खा जाते तुम
हम किसी तौर ये सौदा नहीं होने देंगे